पुरुष महिलाओं से ज़्यादा धोखेबाज़ क्यूँ होते हैं?

खुद पर काबू ना रख पाना नहीं बल्कि प्रभावशाली कामुक उत्तेजना एक
अहम् कारण है की पुरुष महिलाओं से ज़्यादा धोखेबाज़ होते हैं।
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पुरुष कामुक प्रलोभन के जाल में महिलाओं से ज़्यादा जल्दी फँस जाते हैं। और यह सिर्फ कोई नयी शहरी बात नहीं है - शोध यह दर्शाते हैं की पुरुष अधिकतर धोखेबाज़ होते हैं और किसी और के साथी के पीछे भी ज़्यादा पड़ जाते हैं।
तो ऐसा क्या है जो उन्हें ज़्यादा धोखेबाज़ बनता है? क्या वाकई में उनकी कामुक उत्तेजना महिलाओं से ज़्यादा होती है? या फिर उनमे अपनी कामुक इच्छाओं को रोकने की श्रमता कम होती है? यही जानना चाहा एक शोधकर्ताओं की टीम ने। उन्होंने इसके लिए दो प्रशिक्षण किये यह जानने के लिए की पुरुष आखिर उन महिलाओं के पीछे क्यूँ पड़ते हैं जिनका मुश्किल से हाथ आने की संभावना होती है।
ज़्यादा उत्तेजना, ज़्यादा कामवासना
जहाँ तक बात है अपने ऊपर काबू रखने का जहाँ कामुक उत्तेजना बहुत हो, तो पुरुष उतना ही आगे हैं जितना की महिलाएं, ऐसा प्रशिक्षण के ज़रिये सामने आया, और इसलिए शोधकर्ताओं ने यह दूसरा अनुमान लगाया।
और इससे फर्क दिखा महिलाओं और पुरुषों की कामुक उत्तेजना में।
ये सच है, जब पुरुष उन महिलाओं को देखते हैं जिनकी तरफ वो आकर्षित होते हैं, तो उन्हें ज़्यादा उत्तेजना महसूस होती है, ज़्यादा कामुक इच्छाएं भी होती हैं, और वो और ललचाने लगते हैं उन महिलाओं के साथ रिश्ता बनाने के लिए। और रेसेराच के अनुसार, इससे पता चलता है की क्यूँ पुरुष महिलाओं से ज़्यादा धोखेबाज़ होते हैं।
रोक लगाना
लेकिन ऐसा नहीं है की सारे पुरुष ही धोखेबाज़ होते हैं, होते हैं क्या? और ऐसी बहुत सारी महिलाएं हैं जो की धोखेबाजी के मामले में सबसे आगे मिलेंगी।
बात यहाँ पर आके रुक जाती है वो अपने अपनी इन इच्छाओं पर कहाँ तक रोक लगा पाते हैं। जब पुरुष और महिला दोनों यह तय कर लेते हैं की वो आत्मासंयम रखेंगे, चाहे किसी और की तरफ वो कितना भी आकर्षित हो जाएँ, तब दोनों महिला और पुरुष के बीच का फर्क ख़त्म हो जाता है।
विकास
तो आखिर पुरुषों में कामुक उत्तेजना महिलाओं से ज़्यादा क्यूँ होती है? शोधकर्ताओं ने विकास के सिद्धांत का इस्तेमाल किया यह समझाने के लिए की आखिर पुरुष ज़्यादा धोखेबाज़ क्यूँ होते हैं। अगर बात करें मनुष्य इतिहास की, तो कामुक उत्तेजना एक प्राचीन आचरण है जो की समय के साथ महिलाओं से ज़्यादा प्रभावशाली पुरुषों में दिखने लगा।
लेकिन खुद की कामुक इच्छाओं पर काबू रखना, वैज्ञानिकों का मानना है, एक नए तरह का आचरण है और पुराने आचारों पर भारी पड़ सकता है। ये आचरण पुरुष और महिलाओं दोनों में एक साथ विकसित हुआ ताकि वो समाज में अनुकूल तरीके से रह सके - जैसे की अपने ही सबसे अच्छे दोस्त के साथी की तरफ आकर्षित होकर उसके पीछे पड़ जाना


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